الثلاثاء، 2 يونيو 2020

एक्सपर्ट्स की सलाह- इलाज से पहले अपने डॉक्टर या थेरेपिस्ट की डिग्री और लाइसेंस के बारे में पता करें, इलाज का तरीका भी पूछें


जूली फ्रागा/हिलेरी जेकब्स हेंडल. कोरोनावायरस महामारी ने हमारे मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा असर छोड़ा है। लोग चिंता, अकेलेपन से लेकर ट्रॉमा या दुख तक के शिकार हो रहे हैं। अप्रैल में कैंसर फैमिली फाउंडेशन ने एक सर्वे किया था। इस सर्वे में पाया गया कि, 54 प्रतिशत महिलाएं और 37 प्रतिशत पुरुषों ने कहा है किमहामारी ने उनकी मेंटल हेल्थ को बिगाड़ा है। इसमें परिवार सदस्य के बीमार होने, आर्थिक तंगी, नौकरी जाना जैसी कई चिंताएं शामिल हैं।
ऐसे में लोग थैरेपिस्ट का सहारा ले रहे हैं। अब नए थेरेपिस्ट के सामने परेशानियां बताना भी तनावभरा काम है। खासकर अभी के दौर में जब मीटिंग फोन और वीडियो कॉल पर हो रही हैं। रिसर्च बताती हैं किथेरेपिस्ट का इंटरव्यू करना मरीजों के लिए फायदेमंद है, इससे उन्हें पता चलता है कि यह थेरेपी उनके लिए ठीक रहेगी या नहीं। क्योंकि डॉक्टर और मरीज के बीच सामंजस्य होना इलाज में अहम भूमिका निभाता है। इसलिए अपने थेरेपिस्ट को जानना बेहद जरूरी है।
आपका प्रोफेशन बैकग्राउंड क्या है?
सबसे पहले अपने थेरेपिस्ट की डिग्री और लाइसेंस के बारे में जाने। इसके अलावा सेशन की फीस और यह भी पता करें किवे इंश्योरेंस स्वीकारते हैं या नहीं। थैरेपी के मामले में हेल्थ एक्सपर्ट्स लगभग एक तरह की सेवाएं देते हैं, लेकिन उनकी शिक्षा, तरीके और दवाई देने की क्षमता में फर्क होता है।
आप इलाज कैसे करेंगे?
  • ट्रॉमा और कई ट्रेजेडी आपके मानसिक स्वास्थ्य पर अनगिनत तरीकों से प्रभाव डालती हैं। चीन में हाल ही में हुए एक सर्वे में पता चला कि, 35 प्रतिशत लोगों ने कोविड 19 महामारी से संबंधित डिप्रेशन, पैनिक डिसऑर्डर और डर का सामना किया है।
  • क्लीनिकल साइकोलॉजी प्रोफेसर और इदाहो स्टेट यूनिवर्सिटी में शोधकर्ता जोशुआ के स्विफ्ट बताते हैं कि, "किसी भी समस्या का कई तरीकों से इलाज किया जा सकता है। सभी मरीजों को अपने थेरेपिस्ट के इलाज के तरीकों की जानकारी लेनी चाहिए।'अधिकांश तौर पर थैरेपिस्ट के जवाब देने के तरीके से उनके क्लीनिकल स्टाइल का पता चलता है।
  • कुछ डॉक्टर भावनात्मकदुख को गलत सोच का परिणाम समझते हैं। यह थेरेपिस्ट व्यवहार की रणनीतियों जैसे, मूड ट्रैकिंग और एक्सरसाइज पर भरोसा करते हैं। गंभीर घबराहट, नींद न आना और खाने में परेशानियों जैसी तकलीफों से जूझ रहे मरीजों के लिए यह तरीके असरदार साबित हो सकते हैं।
आपको किस तरह के मरीजों के साथ काम करना बेहतर लगता है?
  • इस तरह के सवाल थेरेपिस्ट की स्टाइल का पता करने में कारगर होते हैं। इससे आप उनके इलाज के तरीकों से जुड़ी जानकारी हासिल कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, एक थेरेपिस्ट जवाब दे सकता है कि"मैं आपके सवाल का जवाब दूंगा, लेकिन इससे पहले मैं यह जानना चाहता हूं कि मेरा जवाब आपको क्या मायने रखता है?"
  • वहीं कुछ मामलों में थेरेपिस्ट इसे मौके की तरह लेकर मरीज से पूछतें हैं "आप किस तरह के थैरेपिस्ट की तलाश में हैं?" थेरेपिस्ट के जवाब पर ध्यान देने के बजाए मरीजों को इस बात पर फोकस करना चाहिए कि, उनके रिएक्शन से आपको कैसा महसूस हुआ।
  • साइकोथैरेपी शोधकर्ताओं ने पाया है कि, असरदार थेरेपिस्ट समझदारी, प्रमाणिकता और विशेषता बताते हैं। पहली मुलाकात के दौरान यह क्वालिटी मरीज और डॉक्टर के बीच संबंध बनाने में मदद कर सकती हैं।
मुझे कैसे पता लगेगा कि थेरेपी काम कर रही है?
  • तत्काल रूप से थेरेपी परेशानी दूर नहीं कर सकती है। ट्रीटमेंट कितने जल्दी शुरू हुआ, यह परेशानी की तीव्रता पर निर्भर करता है। महामारी के कारण आया तनाव किसी भी साइज का हो सकता है। किसी के लिए परेशानी भरे हालात जैसे वर्क फ्रॉम होम, घर से पढ़ाई और आवश्यक कार्यकर्ता होना तनाव ला सकता है।
  • अमेरिकन साइकोलॉजिकल एसोसिएशन के अनुसार इस तरह की परेशानी से जूझ रहे मरीजों के लिए छोटी साइकोथेरेपी से फायदा हो सकता है। जो मरीज किसी प्रिय को खोने, बचपन के सदमें जैसी गंभीर परेशानियों से जूझ रहे हैं, उन्हें ट्रॉमासे निकलने तक केयर की जरूरत है।
  • न्यूयॉर्क में एईडीपी साइकोथेरेपिस्ट बेंजामिन लिप्टन कहते हैं कि अपने होने वाले थेरेपिस्ट के इंटरव्यू के बाद खुद से सवाल करें किइस व्यक्ति के बारे में मुझे कैसा महसूस हो रहा है?" अगर आपको कोई भी चीज अनुचित लगती है तो अनुभव का सहारा लें। ऑनलाइन एक थेरेपिस्ट की योग्यता और रिव्यूज अच्छे हो सकते हैं, लेकिन अगर बातचीत ठीक नहीं रही तो भरोसा जमना मुश्किल हो सकता है।




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